क्यों काले तेंदुए का रंग होता है अलग? भारत में यहां पाए जाते हैं
काले तेंदुए बहुत ही दुर्लभ जीव हैं, लेकिन भारत में इनकी संख्या बढ़ रही है।
कर्नाटक, ओडिशा के अलावा मध्य भारत के जंगलों में ब्लैक पैंथर का कुनबा बढ़ा है।
ब्लैक पैंथर तेंदुए ही होते हैं, बस काले रंग की वजह से उनका ये नाम रख दिया गया।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक त्वचा में मैलोनिन और जीन में आए बदलाव की वजह से इनका रंग काला हो जाता है।
रंग बदलने से उनकी जीवनशैली नहीं बदलती। वो सामान्य तेंदुए की तरह ही खाते-पीत और प्रजनन करते हैं।
एक ब्लैक पैंथर आराम से पीले मादा तेंदुए से संबंध बनाकर वंश बढ़ाता है।
काले तेंदुए का जबड़ा 1100 पीएसआई वाला होता है, जो शेर से ज्यादा है। जानवरों के चबाने की ताकत पीएसआई में नापी जाती है।
ये आराम से पेड़ों पर चढ़ जाते हैं और वहां पर अन्य शिकारियों से बचकर सोते हैं।
भारत में कुल तेंदुओं की संख्या 13 हजार के आसपास हो गई है, जो काफी अच्छी बात है।
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