महाशिवरात्रि

उज्जैन में महाकाल ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से अकाल मृत्यु से मुक्ति मिल जाती है। 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

उज्जैन में स्वयं प्रगट शिवलिंग मौजूद हैं। महाकाल का अनवरत दिव्य अभिषेक और सुबह भस्म आरती संपन्न होती है। 

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग 

खंडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर स्थित है। ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के नाम से जाना जाता है। 

पशुपतिनाथ मंदसौर 

मंदसौर में शिवना नदी तट पर पशुपतिनाथ मंदिर स्थित है। शिवलिंग में  भगवान के आठ मुख हैं। शिवलिंग नदी से ही प्रगट हुए थे। 

भोजेश्वर महादेव

भोजपुर में भोजेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। मंदिर में 3.85 मीटर ऊंचे दिव्य शिवलिंग   विराजमान है। पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण एक रात कराया था। 

चौरागढ़ महादेव 

पचमढ़ी के चौरागढ़ में बड़े महादेव का मंदिर स्थित है। यहां त्रिशूल चढ़ाने की मान्यता है, भक्त  2 क्विंटल तक वजनी त्रिशूल महादेव को अर्पित करते हैं।

मतंगेश्वर खजुराहो

खजुराहो का मतंगेश्वर महादेव मंदिर में 9 फीट से ऊंचे शिवलिंग स्थापित है, जो लगातार बढ़ रहे हैं। कहा जाता है कि यह धरती की चरम सीमा तक मौजूद रहेंगें। 

कंदरिया महादेव

खजुराहो का कंदरिया महादेव मंदिर सबसे बड़ा अलंकृत हिंदू मंदिर है, जिसे चंदेल वंश के शासन के दौरान बनाया गया था।

 गुप्तेश्वर महादेव

जबलपुर में गुप्तेश्वर महादेव मंदिर को रामेश्वरम का उपलिंग भी माना जाता है। बताया जाता है कि भगवान राम द्वारा इसकी स्थापना की थी।

 अचलेश्वर महादेव

ग्वालियर अचलेश्वर महादेव मंदिर सड़क के बीच स्थित है। इन्हें दूसरे जगह स्थापित करने का प्रयास किया गया, लेकिन शिवलिंग हिला भी नहीं। 

 जागेश्वर धाम, बांदकपुर 

दमोह जिले के बांदकपुर में भव्य और विशाल जागेश्वरनाथ शिवलिंग विराजमान हैं। यह जागृत शिवलिंग हैं, जिनका उल्लेख स्कंद पुराण में है।