क्या छींक आना वास्तव में होता है अशुभ
छींक के साथ अन्धविश्वास भी जुड़ा है, किसी शुभ कार्य के बीच में या शुरू में छींक आने को अशुभ माना जाता है, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.
विज्ञान के अनुसार छींक आना शरीर का एक रिफ्लैक्स मात्र है, जिस पर व्यक्ति का अपना जोर नहीं होता है.
नाक के अंदर एक म्यूकस झिल्ली होती है, जब इस झिल्ली में खुजली होती है तो हमें छींक आती है.
जब म्यूकस झिल्ली में सूजन आती है तब भी छींक आती है.
कई बार जब नाक में कोई बाहरी चीज चली जाती है, तो उसे शरीर से बाहर निकालने के लिए छींक आती है.
कई बार तेज रोशनी से आंख से रेटिना से दिमाग को जाने वाली ऑप्टिक नस के उत्तेजित होने पर भी छींक आती है.
छींकने पर नाक और मुंह से तेज आवाज के साथ हवा बाहर निकलती है.
छींक आने पर शरीर में कंपन होता है, आंख बंद हो जाती है और इसके बाद हल्कापन महसूस होता है.
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