सामान्य तौर पर बेहद जरूरी दवाएं जैसे पेनकिलर्स और कान-नाक और गले की दवाओं की मांग हर घर में होती है।
महंगाई का असर अब दवाओं पर भी पड़ने वाला है। इससे आम आदमी के जीवन और जेब पर बोझ बढ़ जाएगा।
बता दें, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 1 अप्रैल से लगभग 800 जरूरी और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है।
इनमें पेनकिलर्स, संक्रामक विरोधी, एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, कान-नाक और गले की दवाएं, एंटीसेप्टिक्स, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल दवाएं, एंटीफंगल दवाएं और दिल के मरीजों की दी जाने वाली दवाएं शामिल है।
एक अप्रैल से इन सब दवाओं के दाम बढ़ने वाले हैं। फार्मा उद्योग दवाओं की कीमतों को बढ़ाए जाने की मांग कर रही है।
आंकड़ों के आधार पर Schedule Drug की कीमतें लगभग 10.76 प्रतिशत बढ़ सकती है।
NPPA ने कहा, WPI में वार्षिक रूप से बदलाव किया जाता है। वर्ष 2022 में इसमें 12.12 प्रतिशत वृद्धि की गई।
पिछले कुछ वर्षों में WPI में वार्षिक बदलाव के कारण कीमतों में वृद्धि मामूली रही। यह केवल 1% और 2% के बीच रही।
वैसी दवाएं जिनकी कीमतों पर नियंत्रण होता है, उन्हें Schedule Drug कहते हैं। इसे बिना सरकार की अनुमति के नहीं बढ़ाया जा सकता है।
यह लगातार दूसरा वर्ष है जब non-schedule दवाओं के लिए अनुमत वृद्धि से अधिक वृद्धि की जा रही है।