जानिए भारत का राष्ट्रीय ध्वज कैसे बना तिरंगा झंडा, 1907 से 1947 तक का सफर

Circled Dot

इस वर्ष हम स्वतंत्रता की 77वां वर्षगांठ मना रहे हैं। देश में 15 अगस्त को एक उत्सव की तरह मनाया जाता है।

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इस उत्सव के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराएंगे। राष्ट्र की पहचान हमारा तिरंगा झंडा देश की शान है।  

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क्या आप जानते हैं भारतीय राष्ट्रीय ध्वज से ये तिरंगा झंडा कैसे बना? बता दें कि इसकी शुरुआत 1906 में हुई, आइये जानें पूरी कहानी-

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देश आजाद होने के पहले ही तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार कर लिया गया था। लेकिन उस वक्त ध्वज ऐसा नहीं दिखता था। 

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1. स्वदेशी आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का पहला स्वरूप सन् 1906 में अपनाया गया और कलकत्ता में इसे फहराया गया।

2. कई इतिहासकारों के अनुसार, 1907 में पेरिस में भारतीय क्रांतिकारियों के साथ मैडम भीकाजी द्वारा फहराए गए ध्वज को दूसरा ध्वज मानते हैं।

3. 1917 में राष्ट्रीय ध्वज का तीसरा स्वरूप सामने आया। इसमें पांच लाल और चार हरी क्षैतिज पट्टियां थी।

4. इसके बाद विजयवाड़ा में INC के सत्र में 1921 में गांधी जी के चरखे के चिह्न वाले एक झंडे का इस्तेमाल किया गया, जिसे चौथा ध्वज माना गया।

5. सन् 1931 में जिस ध्वज को सामने लाया गया उसमें तीन रंग यानी केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियां थीं। इस ध्वज के मध्य में अशोक चक्र नहीं बल्कि गांधीजी का चरखा था। 

6. संविधान सभा की झंडा समिति के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में 22 जुलाई 1947 को वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को अंतिम रूप से स्वीकार कर लिया गया।

जान लीजिये राष्ट्रीय ध्वज की ये बातें- 26 जनवरी 1950 को तिरंगा, भारत का राष्ट्रीय ध्वज बना इसमें तीन केसरिया, सफेद और हरे की पट्टी है

सफेद पट्टी पर नीले रंग का चक्र बना है, जिसे अशोक चक्र कहते हैं अशोक चक्र में 24 तिलियां होती हैं ध्वज का अनुपात 3:2 होता है आंध्र प्रदेश के पिंगली वेंकैया ने राष्ट्रीय ध्वज का डिजाइन बनाया था