सूर्य ग्रहण क्यों होता है और कितने प्रकार का होता है? जानिए

solar eclipse

सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य और हमारी पृथ्वी के बीच चंद्रमा से गुजरता है। 

चंद्रमा की छाया पृथ्वी को कवर करती है जिसक कारण हमें सूर्य ग्रहण देखने को मिलता है। 

सूर्य ग्रहण चंद्रामा और पृथ्वी की दूरी पर निर्भर करता है। इसका संरेखण लगभग 6 महीने में होता है।

सूर्य ग्रहण मुख्य तौर पर तीन प्रकार के होते हैं।

आंशिक सूर्य ग्रहण में चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक सीधी रेखा में नहीं होते हैं। 

ऐसे में चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को ही कवर कर पाता है।

पूर्ण सूर्य ग्रहण   पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं। 

इसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से कवर कर लेता है और इस दौरान चंद्रमा और पृथ्वी की बीच की दूरी भी सबसे कम होती है। 

वलयाकार सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के सीधी रेखा में होते हैं और साथ ही एक ही तल पर भी होते हैं। 

इस दौरान चंद्रमा सूर्य का 97 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। 

कुंडलाकर सूर्य ग्रहण हमें फायर ऑफ रिंग के रूप में दिखाई देता है।